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शनिवार, 27 दिसंबर 2014

सीताराम यादव (भगत जी )



 भगत जी-सीताराम यादव
भगत जी के नाम से विख्यात सीताराम यादव बहुत ही हँसमुख और  मिलनसार व्यक्ति हैं। उनका   जन्म  उत्तर प्रदेश के जनपद सुल्तानपुर (अब अमेठी) ब्लॉक भेंटुआ  के  गाँव शारदान में,  20 अगस्त सन 1949 ई. को ,  एक सुखी एवं संपन्न परिवार में हुआ। सीताराम का  लालन-पालन इनकी  माता मुन्नी देवी की देख-रेख  में हुआ   तथा शिक्षा-दीक्षा   पिता श्री  राम किशुन यादव की देख-रेख में प्राप्त की  । भगत जी ने  प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राइमरी पाठशाला शारदान से  तथा मिडल स्तर की परीक्षा  जूनियर हाई स्कूल धरई माफी से प्राप्त  की। 

 यादव जी का विवाह  बचपन में ही हो गया था,  क्योंकि उन दिनों छोटी आयु में विवाह कर देने की प्रथा थी।  विवाह के पांच, सात अथवा  नौ  साल  बाद  गौना  लाने की प्रथा थी। उसी प्रथा के अनुसार उनका विवाह भी छः वर्ष की छोटी आयु में  हो गया था  और  उसके  सात साल बाद गौना आया। सौभाग्य वश उनको  गयादेई नामक  सुशील एवं सभ्य पत्नी मिली।    उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियों  के अतिरिक्त  स्वामीनाथ  नाम का एक परिश्रमी एवं  होनहार  पुत्र भी है। वह   राजा   सुखपाल  इंटर कालेज, तिरहुन्त  में अध्यापक  है। । दोनो  बेटियाँ, जिनके नाम चन्द्रावती और रेखा हैं,  विवाहित है और अपने ससुराल में रहती हैं।

भगत जी की आवाज बहुत सुरीली है।  इस कारण पढाई के दौरान  उनको कविता गायन, अंताक्षरी आदि जनपदीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का सौभाग्य भी  प्राप्त हुआ। अंताक्षरी की  एक जनपदीय प्रतियोगिता में इनके द्वारा सुनाई गई निम्नलिखित  कविता-पंक्तियों  की बहुत सराहना हुई थी : -

पंकज कोश में भृंग फँस्यो, अपने मन यों करते मनसूबा। 
 होयेंगे प्रात उवायेंगे दिवाकर, मै उड़ि जाब पराग लै खूबा। 
बीच में और की और भई,नहि जानत काल को ब्याल अजूबा।  
आइ गयंद चबाइ गयो, रहिगें मन ही मन को मनसूबा। 


भगत जी का मुख्य व्यवसाय कृषि है।  उसके अतिरिक्त शारदन बाजार में उनका एक  वस्त्रालय भी है।  दिन में  अक्सर  वह अपने उसी वस्त्रालय में बैठे हुए मिलते है।मृदुभाषी एवं मिलनसार होने के कारण उनके पास  हर समय लोगों का आना -जाना लगा रहता है। सादा जीवन और उच्च विचार उनकी प्रमुखता है। विद्वान और  उदार होने के साथ वे  बांके बिहारी,  भगवान श्रीकृष्ण के परम  भक्त भी हैं और इस  कारण अक्सर उनका वृन्दावन धाम आना -जाना लगा रहता है।

भगत जी को  पंडिताई का अच्छा ज्ञान है।  व्याह-शादियों आदि  के लिए शुभ  मुहूर्त विचारने में बहुत ही माहिर माने जाते हैं।    लोगो के दुःख -सुख में  सदैव तत्पर  रहने  वाले  सीताराम जी का  समाज के हर वर्ग में अच्छा  मान-सम्मान है। 

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वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणां ।
यदोर्वन्शं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।i
यत्र-अवतीर्णो भग्वान् परमात्मा नराकृतिः।
यदोसह्त्रोजित्क्रोष्टा नलो रिपुरिति श्रुताः।।
(श्रीमदभागवद्महापुराण)


अर्थ:

यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में स्वयम भगवान परब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हें श्रीकृष्ण कहते है. जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा.