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गुरुवार, 13 जनवरी 2011

1 टिप्पणी:

  1. वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणां ।
    यदोर्वन्शं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।i
    यत्र-अवतीर्णो भग्वान् परमात्मा नराकृतिः।
    यदोसह्त्रोजित्क्रोष्टा नलो रिपुरिति श्रुताः।।
    (श्रीमदभागवद्महापुराण)


    अर्थ:

    यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में स्वयम भगवान परब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हें श्रीकृष्ण कहते है. जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा.

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वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणां ।
यदोर्वन्शं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।i
यत्र-अवतीर्णो भग्वान् परमात्मा नराकृतिः।
यदोसह्त्रोजित्क्रोष्टा नलो रिपुरिति श्रुताः।।
(श्रीमदभागवद्महापुराण)


अर्थ:

यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में स्वयम भगवान परब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हें श्रीकृष्ण कहते है. जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा.