समर्थक

हैहय वंश -by Ram AvtarYadav

हैहय वंश
यदु के पांच देवोपम पुत्र हुए जिनके नाम इस प्रकार है:-
१.सहस्त्रद
२. पयोद
३. क्रोष्टा
४. नील
५. अंजिक
इनमे से सहस्त्रद और क्रोष्टा के वंशज पराक्रमी हुए तथा इस धरा पर ख्याति प्राप्त किया| सहस्त्रद से हैहय वंश चला तथा वै हैहयवंशी क्षत्रिय कहलाए| हैहय वंश के प्रमुख राजवंशो के नाम नीचे दिए गए है:-
यदु
|
सहस्त्रद
|
शत्जी
|
हैहय
|
धर्मनेत्र
|
कुन्ति
|
साहग्य
|
महिष्यमंत
|
भद्र्श्रेय
|
दुर्दम
|
कनक
|
कृतवीर्य
|
अर्जुन
{अर्जुन सहस्त्र भुजाओं से युक्त सातो द्वीपों का राजा हुआ| इन्होने एक बार महाबलशाली रावण को बंदी बना लिया था| इनका विस्तृत परिचय इसमें आगे चलकर दिया जाएगा|]
|
जयध्वज
|
तालजंघ
|
वीतिहोत्र
|
अनंत
|
दुर्जय
|
सुप्रतीक
|
चेदि
|
कैशिक
|
चिदी
|
वीरवाहु
|
सुबाहु
हैहय कुल में वीतिहोत्र, भोज, अवन्ति,तोंडीकेर, तालजंघ, भारत आदि क्षत्रिय समुदाय उत्पन्न हुए| इनकी संख्या बहुत ज्यादा है इसलिए इनके अलग-अलग नाम नहीं बताये गए| वृष आदि पुन्य आत्मा भी इस धरा पर उत्पन्न हुए| वृष के पुत्र मधु थे| मधु के वंशज माधव कहलाए|
वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणां ।
यदोर्वन्शं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।i
यत्र-अवतीर्णो भग्वान् परमात्मा नराकृतिः।
यदोसह्त्रोजित्क्रोष्टा नलो रिपुरिति श्रुताः।।
(श्रीमदभागवद्महापुराण)


अर्थ:

यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में स्वयम भगवान परब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हें श्रीकृष्ण कहते है. जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा.